Special measures to make the children graceful and nurture them बच्चों को शालीन बनाने और उनकी परवरिश करने के खास उपाय
बच्चे बहुत ही नाजुक मन के होते हैं। वह एकदम कच्ची मिट्टी के समान होते है। जिसे हम जिस आकृति में ढाल दे,उसी में ढल जाते हैं। अर्थात वे जिस माहौल में रहते हैं उस माहौल का उन पर असर पड़ता है और वह वैसे ही बन जाते हैं।
ज्यादातर अभिभावकों के लिए पालन पोषण करने का अर्थ केवल बच्चों की जरूरतों को पूरा करना है। लेकिन बच्चों की जरूरतों को पूरा करना ही है। एक आदर्श पालन पोषण नहीं है या फिर एक आदर्श परवरिश नहीं है। बल्कि अपने बच्चों को अच्छी बातें सिखाना,अच्छे संस्कार देना,यह भी अच्छी परवरिश में शामिल है। अपने बच्चों को आत्मनिर्भर,दॄढ़ निश्चयी और एक जिम्मेदार व्यक्ति बनाना। यह सब भी आदर्श परवरिश में शामिल है।
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1. नियमों का पालन करना सिखाए- बच्चे हमेशा वही बातों को फॉलो करते हैं जो हम अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। हम जो भी कार्य करते हैं, उन पर उसका विशेष प्रभाव पड़ता है। अपने बच्चों को शालीन, समझदार बनाने के लिए उन्हें बचपन से ही नियमों का पालन करना सीखाना चाहिए। उन्हें अनुशासन सिखाने के लिए कुछ निर्देश देना चाहिए।
अगर वह हमारी बातों को नहीं समझ पा रहे हैं तो हमें उन्हें हमेशा प्यार से समझाना चाहिए। अपने बच्चों को छोटी सी उम्र से ही सभी अनुशासित बातें और विभिन्न प्रकार के नियमों का पालन करना सिखाए ताकि वे शुरू से ही अनुशासनप्रिय रहे। उन्हें शुरू से ही अनुशासित रखना चाहिए ताकि वे बड़े होकर किसी भी बात का उल्लंघन ना करें,उसके खिलाफ ना जाए।
2.छोटी-छोटी सी बातों पर या गलती हो जाने पर बच्चों को डांटे मारे नही- छोटी छोटी सी बातों पर या किसी गलती हो जाने पर बच्चों को हमें मारना नहीं है क्योंकि मारने पीटने से बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। फिर उन्हें हमारी डांट का ज्यादा असर नहीं पड़ता है। जिस काम को करने से आपने मना कर रहे हैं उसे उसी काम को वे बार-बार करेंगे। इसलिए बच्चों को हमेशा प्यार से समझाये और उन्हें यह बताएं कि वह जो काम कर रहे हैं वह गलत है या सही है क्योंकि वह जब सही काम करेंगे तो हम उन्हें कभी नहीं रोकेंगे लेकिन जब भी वह कोई गलत काम करेंगे तो यह हमारा फर्ज है कि हम उन्हें बताएं कि यह गलत है और आपको ऐसा नहीं करना है।
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यह नहीं होना चाहिए कि अभी बच्चा छोटा है तो बाद में सीख जाएगा। कुछ पेरेंट्स की छोटी-छोटी बातों पर बच्चे गुस्सा हो जाते हैं,उनकी बातों को समझते नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि माता पिता निर्देश दे रहे हैं। और उन्हे कभी-कभी यह सब अच्छा नहीं लगता तो ऐसे में बच्चों को हमें मारना पीटना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें प्यार से समझाना चाहिए।
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3.बच्चों केे साथ वक्त बिताना- हमें बच्चों केे साथ वक्त बिताना है और उन्हें अच्छी सीख देना है। उनकी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना है। उनके साथ मित्रता का व्यवहार रखना है और उनसे खुलकर बातें करना है। हमें दुनिया को अपनी नजरों से नहीं बल्कि उनकी नजरों से देखना है तभी हम उनकी हर एक बात को अच्छी तरह से समझ पाएंगे। हमें अपने बच्चों पर विशेष ध्यान रखना है कि वह किन लोगों के साथ रह रहे हैं। उनका साथ किस तरह का है। उनका फ्रेंड सर्कल कैसा है।
4.हर एक जिद को पूरा ना करें- हमें अपने बच्चों की हर एक ख्वाहिश को पूरी नहीं करना है। हमें सिर्फ उसकी उन्हीं जरूरतों को पूरा करना है जो उनके लिए बेहद आवश्यक है कि हमें उनकी बेफिजूल की आवश्यकता को बिल्कुल भी पूरा नहीं करना है क्योंकि ऐसा करने से बच्चे इस चीज के आदी हो जाते हैं उन्हें लगता है कि हम अपने माता-पिता से जो भी डिमांड करेंगे वह हमें तुरंत ही मिल जाएगा,चाहे वह कितना ही महंगा क्यों ना हो।
हमें अपने बच्चों को बताना है कि पैसे कैसे कमाए जाते हैं, उसके लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, पैसों का फिजूल खर्च करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है और हमें उन्हें पैसे की महत्वता को समझाना है ताकि वह पैसे को सहेजकर रखें या उसे जोड़ कर रखें।
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हमें अपने बच्चों की हर एक मांग को बिल्कुल भी पूरा नहीं करना है। हमें उन्हें प्यार से समझाना है यह नहीं कि अगर बच्चे ने किसी चीज के लिए जिद की तो हमने उसे मारना पीटना शुरु कर दिया,बिल्कुल नहीं। हम उसे प्यार से समझाना है,हर एक पहलू को,हर एक बात को अच्छी तरह से एक्सप्लेन करना है।
5.गलत काम करने से रोके- हमें अपने बच्चों को गलत काम करने से रोकना है। अगर वह लड़ाई झगड़ा कर रहा है, अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा है, बच्चा अगर कोई भी गलत काम करता है तो हमें उससे समझाना है यह उसके लिए ठीक नहीं अगर वह ऐसा करता है तो उसके लिए उसको पनिश मिलेगा। वह कुछ भी गलत करता है उसके लिए उसे दंडित किया जाएगा है।
बच्चा अगर किसी से लड़ाई झगड़ा करें,बहस करें तो तुरंत ही बच्चे को रोक दे कि ऐसा नहीं करना है। यह गलत है ऐसा करना आपके लिए ठीक नहीं है यह बैड मैनर्स है। उसे समझाना है कि उसे हमेशा अच्छे काम करने हैं,अच्छी आदतों को अपने जीवन में शामिल करना है ताकि वह एक अच्छा इंसान बन पाए।
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6.बच्चों को आत्मनिर्भर बनाएं- हमें अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है,हमें उन्हें अपने फैसले खुद ही लेने देना है। यह नहीं कि उनकी छोटी छोटी बातों पर या फिर छोटे से छोटे फैसले पर हम उनके ऊपर हावी हो जाए।
हमें उन्हें आजादी देना हैं फैसले लेने की। अगर हम उनके छोटी से छोटी बातों पर रोक लगाएंगे और बार-बार यह कहेंगे कि अभी तुम छोटे हो तुम्हें यह निर्णय नहीं लेना चाहिए,तुम ऐसा नहीं कर सकते तो ऐसा मे बच्चा आत्मनिर्भर नहीं हो पाएगा। वह हमेशा हर काम को करने के लिए,हर फैसला लेने के लिए आप पर ही निर्भर रहेगा। और इस तरह से वह अपने आप को मजबूत नहीं बना पाएगा वह हमेशा फैसले लेने से कतराएगा। उसे लगेगा कि अभी तक तो मेरे फैसले हमारे बड़े लेते आए हैं तो निर्णय लेने के लिए वह आप पर डिपेंड रहेगा और भी अपने अनेकों कामों के लिए वह आप पर ही निर्भर रहेगा।
7. बच्चों के सामने शालीनता से पेश आएं- हमें अपने बच्चों के सामने कभी भी गलत भाषा का प्रयोग नहीं करना है और ना तो उनके सामने किसी प्रकार का कोई लड़ाई झगड़ा करना है। बच्चे का मन बहुत ही नाजुक होता है वह अगर हमें लड़ाई झगड़ा करते देखेंगे,बहस करते देखेंगे तो उन पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए हमें बच्चों के सामने हमेशा अच्छे शब्दों को,अच्छे आचरण को प्रदर्शित करना है ताकि वह भी इन बातों को सीख पाए। बच्चे अक्सर उन्हीं बातों पर ध्यान देते हैं जो हम अपने जीवन में प्रतिदिन दोहराते हैं। इन्हीं बातों का हमारे बच्चों पर और उनके मन पर,व्यवहार पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
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